1. यदि सर्वगुण संपन्न पुत्र की इच्छा हो तो युगल को चाहिए कि वह स्त्री के ऋतुस्राव से लेकर सोलहवीं रात्रि में गर्भ धारण का फ्र्यास करे, जिससे उसे इच्छित पुत्र का वरदान प्राप्त होगा।


2. यदि श्रेष्ठ व गुणी पुत्र की अभिलाषा हो तो युगल को चाहिए कि ऋतुस्राव की चौदहवीं रात्रि का चयन करे और स्त्री गर्भ धारण करे, तो उसे इच्छित पुत्र की
प्राप्ति होती है।

3. इसी प्रकार यदि उत्तम श्रेणी का पुत्र पाने की अभिलाषा हो तो युगल को चाहिए कि वे ऋतुस्राव से बारहवीं रात्रि का चयन गर्भाधान हेतु करे तो उत्तम पुत्र का जन्म होता है।

4. यदि स्त्री पुरुष की अभिलाषा चतुर पुत्र को जन्म देनी की हो तो वे ऋतुस्राव से लेकर दंसवीं रात्रि का चयन कर समागम करें और गर्भधारण करें तो चतुर पुत्र का जन्म होता है।

5. इसी प्रकार ऋतुस्राव की आठवीं रात्रि में गर्भधारण करने वाली स्त्री ऐश्वर्यशाली पुत्र को जन्म देकर कुल का नाम रोशन करती है।

6. यदि ऋतुस्राव की ठी रात्रि गर्भधारण करे तो वह सामान्य श्रेणी व सामान्य आयु वाले पुत्र को जन्म देती है।

7. इसी प्रकार ऋतुस्राव की चौथी रात्रि में स्त्री गर्भधारण करे तो वह दरिद्र व अल्प आयु पुत्र को जन्म देती है।