1. यदि युगल को सौभाग्यशाली कन्या की अभिलाषा हो तो वे ऋतुस्राव से लेकर पन्द्रहवीं रात्रि का चयन कर समागम करें और स्त्री गर्भ धारण करे तो वह सौभाग्यशाली कन्या का जन्म देती है।
2. ऋतुस्राव से लेकर तेहरवीं रात्रि में गर्भधारण करने वाली स्त्री वर्णसंकर सन्तति करने वाली कन्या को जन्म देती है।
3. इसी प्रकार यदि कोई स्त्री ऋतुस्राव की ग्यारहवीं रात्रि में गर्भधारण कर पुत्री को जन्म दे तो वह दुश्चरित्र कन्या को जन्म देती है।
4. यदि ऋतुम्राव की नौवीं रात्रि में स्त्री गर्भधारण कर ले तो वह ऐसी कन्या को जन्म देती है जो ऐश्वर्यशाली होती है।
5. ऋतुस्राव की सातवीं रात्रि में गर्भधारण करने वाली स्त्री वंध्या कन्या को जन्म देती है।
6. इसी प्रकार ऋतुम्राव से लेकर पांचवीं रात्रि में धारण करने वाली स्त्री पुत्रवती कन्या को जन्म देती है।

Reference:- स्वरोदय तंत्र