लेटिन नाम- ऐमारेन्थस विरिडिस (Amaranthus viridis)

चौलाई का रस गठिया, ब्लडप्रेसर और हृदय के रोगियों के लिए लाभदायक है। इसकी सब्जी भी खाई जा सकती है। पेट के रोग, कब्ज और बाल गिरने पर चौलाई की सब्जी खाना लाभदायक है।

पथरी : चौलाई के पत्तों का साग नित्य खाते रहने से पथरी गल जाती है।

रक्तचाप, बलगम, बवासीर, गर्मी के दुष्प्रभाव चौलाई की सब्जी नित्य खाने से ठीक हो जाते हैं।

भूख : चौलाई का साग भूख बढ़ाता है। इसमें सोना (Gold) पाया जाता है।

पागल कुत्ते के काटने के बाद व्यक्ति जब पांगल हो जाये, स्वयं ही दूसरों को काटने लगे, ऐसी अवस्था में काँटे वाली जंगली चौलाई की जड़ 50 ग्राम से 125 ग्राम तक पीस कर पानी में घोल कर बार-बार पिलाने से मरता हुआ रोगी बच जाता है। यह विष-नाशक है। हरेक दंश पर लेप करें।
Reference -स्वामी ओमानन्द सरस्वती : 'शाक-भाजी द्वारा चिकित्सा'

चौलाई का शाक रूखा होता है। चौलाई का शाक नशा और विष के प्रभाव को नष्ट करता है। रक्तपित्त में लाभदायक है।

--योगाचार्य विनय पुष्करणा